विद्युत सखियों ने रचा इतिहास: यूपी में वसूला 3,250 करोड़ का बिजली बिल; आर्थिक स्वावलंबन की नई इबारत

विद्युत सखियों ने रचा इतिहास: यूपी में वसूला 3,250 करोड़ का बिजली बिल; आर्थिक स्वावलंबन की नई इबारत

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collect electricity bills worth Rs 3,250 crore in UP

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की 'आधी आबादी' न केवल आत्मनिर्भर हो रही है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी रिकॉर्ड योगदान दे रही है। योगी सरकार की 'विद्युत सखी योजना' के तहत ग्रामीण महिलाओं ने अब तक 3,250 करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल कलेक्शन कर एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। यह पहल न केवल बिजली चोरी और बकाये की समस्या को हल कर रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाकर समाज में उनका मान-सम्मान बढ़ा रही है।

फील्ड में तैनात 15 हजार 'विद्युत सखियां'

प्रदेश में अब तक 30,000 महिलाओं को विद्युत सखी के रूप में पंजीकृत किया जा चुका है।

  • सक्रिय भागीदारी: वर्तमान में 15,000 से अधिक प्रशिक्षित महिलाएं पूरी सक्रियता के साथ फील्ड में तैनात हैं और घर-घर जाकर बिल जमा करने का कार्य कर रही हैं।

  • विस्तार योजना: शेष प्रशिक्षित महिलाओं को भी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जल्द ही मैदान में उतारा जाएगा, जिससे ग्रामीण ऊर्जा सेवाओं का पूर्णतः विकेंद्रीकरण हो सके।

कमीशन मॉडल से लखपति बनीं 'दीदियां'

इस योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं के लिए आय का एक सम्मानजनक और स्थायी जरिया तैयार किया है।

  • आय का जरिया: ₹2,000 तक के बिल कलेक्शन पर विद्युत सखी को ₹20 का फिक्स्ड कमीशन मिलता है।

  • बड़े बिल पर लाभ: ₹2,000 से अधिक के बिजली बिल पर 1 फीसदी (1%) कमीशन देय है।

  • सफलता: इस पारदर्शी कमीशन प्रणाली के चलते राज्य की हजारों महिलाएं अब 'लखपति दीदी' की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।

उपभोक्ताओं को राहत, महिलाओं को रोजगार

विद्युत सखी योजना ने ग्रामीण उत्तर प्रदेश में दोहरे लक्ष्यों को साधा है।

  1. उपभोक्ताओं की सुविधा: ग्रामीणों को अब बिल जमा करने के लिए तहसील या बिजली दफ्तर की लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ता। उनके दरवाजे पर ही डिजिटल रसीद के साथ भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।

  • सशक्तिकरण: महिलाओं के लिए यह योजना न केवल रोजगार का साधन है, बल्कि इससे उनके तकनीकी कौशल और निर्णय लेने की क्षमता में भी वृद्धि हुई है।

योगी सरकार की यह पहल 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।